
दो साल पहले तक नौसिखुआ समझे जा रहे कांग्रेस के महासचिव और युवा सांसद राहुल गांधी 15 वीं लोकसभा के लिए हुए चुनावों में राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण उत्तर प्रदेश में दो बड़े दलों बसपा और सपा को धता बताने वाली आंधी साबित हो गए।राहुल ने कांग्रेस को उप्र में पुराना गौरव दिलाने के लिए करीब ढाई साल तक जमीनी काम किया और लोकसभा चुनावों में इस युवा नेता का करिश्मा रंग ले आया। राहुल ने अमेठी को छोड़ कर प्रदेश की जिन 14 लोकसभा सीटों पर प्रचार किया था उनमें से नौ पर कांग्रेस को जीत मिली।पूरे देश में पार्टी के चुनाव प्रचार की अगुवाई कर रहे राहुल ने उप्र में कांग्रेस को पुनर्जीवित करने के लिए बहुपक्षीय योजना बनाई थी। वर्ष 2007 में हुए विधानसभा चुनावों में प्रदेश में पार्टी के निराशाजनक प्रदर्शन से राहुल भी निराश थे। राहुल ने प्रदेश की 14 लोकसभा सीटों पर चुनावी सभाएं की जिनके फलस्वरूप महाराजगंज कुशीनगर गोंडा प्रतापगढ़ झांसी बाराबंकी धौरहरा बरेली और मुरादाबाद में कांग्रेस ने जीत दर्ज की। जीती गयी इन सीटों में से अधिकांश सपा और बसपा का गढ़ मानी जा रही थीं।ऐसे में ये साफ़ है की राहुल की आंधी तमाम राजनितिक दलों को ले उडी..
