Thursday, 28 May 2009

राहुल की आंधी...


दो साल पहले तक नौसिखुआ समझे जा रहे कांग्रेस के महासचिव और युवा सांसद राहुल गांधी 15 वीं लोकसभा के लिए हुए चुनावों में राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण उत्तर प्रदेश में दो बड़े दलों बसपा और सपा को धता बताने वाली आंधी साबित हो गए।राहुल ने कांग्रेस को उप्र में पुराना गौरव दिलाने के लिए करीब ढाई साल तक जमीनी काम किया और लोकसभा चुनावों में इस युवा नेता का करिश्मा रंग ले आया। राहुल ने अमेठी को छोड़ कर प्रदेश की जिन 14 लोकसभा सीटों पर प्रचार किया था उनमें से नौ पर कांग्रेस को जीत मिली।पूरे देश में पार्टी के चुनाव प्रचार की अगुवाई कर रहे राहुल ने उप्र में कांग्रेस को पुनर्जीवित करने के लिए बहुपक्षीय योजना बनाई थी। वर्ष 2007 में हुए विधानसभा चुनावों में प्रदेश में पार्टी के निराशाजनक प्रदर्शन से राहुल भी निराश थे। राहुल ने प्रदेश की 14 लोकसभा सीटों पर चुनावी सभाएं की जिनके फलस्वरूप महाराजगंज कुशीनगर गोंडा प्रतापगढ़ झांसी बाराबंकी धौरहरा बरेली और मुरादाबाद में कांग्रेस ने जीत दर्ज की। जीती गयी इन सीटों में से अधिकांश सपा और बसपा का गढ़ मानी जा रही थीं।ऐसे में ये साफ़ है की राहुल की आंधी तमाम राजनितिक दलों को ले उडी..

Wednesday, 27 May 2009


आतंकवादी हमले:आख़िर ऐसी बेबसी क्यों??

हमले के बाद शोक में डूबा दिन बीत जाएगा, हमला किसने किया..इस सवाल की छटपटाहट भी ख़त्म हो जायेगी और आतंकवादी हमलों के मकड़जाल के शब्दकोश मे अहमदाबाद, जयपुर और दिल्ली के बाद मुंबई का नाम भी जुड़ जायेगा॥हम भी जल्द ही सामान्य स्थिति में लौट आयेंगे॥फिर कल कोई और दिन होगा, कोई और शहर॥और ज्यादा देह के चीथड़े...और टी।वी। के परदे पर दहशत का एक और द्रृश्य...यहां सवाल ये नही है कि आतंकवादी हमले होने के बाद अगर अफ़सोस और धैर्य का नपातुला मरहम न लगाया जाय तो आख़िर किया क्या जाय? दरअसल यहां सवाल इस बात का है कि क्यों भारत आतंकवादियों की पसंदीदा सैरगाह बनता जा रहा है?? हिन्दुस्तान के ख़ूबसूरत शहरों के चेहरों पर पड़े ख़ून के छींटे इस बात के स्मरण पत्र की तरह हैं भारत आतंकी हमलों की जद मे है और हर हमले के बीच का अंतराल एक धोखे की तरह है।समझ मे ये नही आता कि आख़िर भारत ये स्वीकारने मे अपने क़दमों को पीछे क्यों कर ले रहा कि आतंकवाद से पीड़ित नाज़ुक देशों में से एक वो भी है।

Friday, 15 May 2009

मुझको याद किया जाएगा

मुझको याद किया जाएगा
आँसू जब सम्मानित होंगे मुझको याद किया जाएगा
जहाँ प्रेम का चर्चा होगा मेरा नाम लिया जाएगा।
मान-पत्र मैं नहीं लिख सका

राजभवन के सम्मानों का
मैं तो आशिक रहा जनम से
सुन्दरता के दीवानों का
लेकिन था मालूम नहीं ये
केवल इस गलती के कारन
सारी उम्र भटकने वाला,
मुझको शाप दिया जाएगा।
खिलने को तैयार नहीं थी

तुलसी भी जिनके आँगन में
मैंने भर-भर दिए सितारे
मटमैले दामन मेंपीड़ा के संग रास रचाया
आँख भरी तो झूमके गाया
जैसे मैं जी लिया किसी से क्या इस तरह जिया जाएगा
काजल और कटाक्षों पर तोरीझ रही थी दुनिया सारी

मैंने किंतु बरसने वालीआँखों की आरती उतारी
रंग उड़ गए सब सतरंगीतार-तार हर साँस हो गई
पता हुआ यह कुर्ता अब तो ज़्यादा नहीं सिया जाएगा
जब भी कोई सपना टूटामेरी आँख वहाँ बरसी है

तदपा हूँ मैं जब भी कोईमछली पानी को तरसी है,
गीत दर्द का पहला बेटादुख है उसका खेल खिलौना
कविता तब मीरा होगी जब हँसकर ज़हर पिया जाएगा।

गोपाल दास नीरज

सरकने का ये दौर..सिसकियों का ये ज़माना..

AI generated Image from ChatGPT सरकने का ये दौर..सिसकियों का ये ज़माना.. बुझा हुआ आसमां..कच्ची दीवारों का अफ़साना.. ठोकरों से भरी राहें...रास्...