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किसी वीकेंड पर आ क्यों नहीं जाते
उसने ये बात जैसे अनायास कह दी
मैं बस उसकी यही बात सीने से लगाए बैठा हूं
सब कुछ जैसे उसकी इस एक बात पर मानो वक्त ठहरा है
उसकी ढेर सारी अच्छी बातों में वीकेंड वाली बात भी अब शामिल है
ठीक वैसे ही जैसे वो कहती है कि मुझसे बातें करना उसे अच्छा लगता है
मगर मैं जाउं और वो ना मिले?
मैं मायूसी की शाम लिए लौट न आउं
मैं एक अरसे से मायूसी और प्रेम दोनों से दूर हूं
डर लगता है कि कहीं फिर से उदासी से रिश्ता ना जोड़ लूं
मैने प्रेम और दुख दोनों साथ साथ अनुभव किए हैं
मेरा मानना है कि उदासी और मायूसी के बगैर प्रेम चल ही नहीं सकता
उससे मिलने की बेचैनी और ना मिलने का डर भी यार दोस्त हैं आजकल
और फिर कहीं वीकेंड वाली बात उसने यूं हीं न कह दी हो?
तुम किसी वीकेंड क्यों नहीं चली आती मेरे पास?
मगर क्या वो आएगी भी कभी मेरे पास मुझसे मिलने?
वैसे वो आएगी तो जानती है मैं पूरा शहर परोस दूंगा
उसे घबराहट, बैचेनी और डर सिर्फ मेरे मिलने की होगी
मैं ना मिलूं उससे ये डर उसे कभी ना सताएगा
पता है सेनोरिटा..तुम जिस वीकेंड आओगी मैं उन 2 दिनों को कभी ना लौटाउंगा
पहले तो जी भर के अपनी आंखों की हदों में तुम्हें संभालूंगा
तुम्हारी पसंद-नापसंद की लिस्ट बनाउंगा
तुम कहोगी तो पहाड़ों के गांव में सपने सजाउंगा
तुम चाहोगी तो संमदर के इस शहर में तुम्हें रिझाउंगा
मैने कभी बताया नहीं ना..मैं तुम्हे शॉपिंग कराना चाहता हूं
कोई लाल रंग की ड्रेस खरीदना मेरा मन है
वैसे तुम 2-4 ड्रेस और लोगी तो मुझे खुशी होगी
येलो, पर्पल, और हां ब्लैक रंग की ड्रेस माई फेवरेट..
तुम्हें मेरी शायरी अच्छी लगती है ना?
हम किसी प्यारी सी पुरानी लाइब्रेरी चलेंगे
तुम्हें एक खूबसूरत सी किताब गिफ्ट करूंगा
हम किसी डिम रोशनी वाले कैफे में बैठेंगे
तुम्हारी खामोशी को महसूस करते हुए बताउंगा कि मैने
कब कब कितना चाहा है तुम्हे
जानां..हमें किसी मूवी डेट पर भी चलना चाहिए.
क्या पता मॉल की सीढ़ियों पर गिरते हुए तुम्हें फिर संभालने का मौका मिल जाए..
देखो ना..कितने मंहगे ख्वाब हैं मेरे...
मेरी हैसियत और मुकद्दर से बाहर के ख्वाब....
प्रशान्त प्रखर पाण्डेय
Copyright Date : 01-10-2024
